भारत सरकार और आयकर विभाग समय-समय पर नए नियम लाते रहते हैं, जिससे लोगों को अपने वित्तीय लेनदेन को लेकर सतर्क रहना पड़ता है। 1 अप्रैल 2025 से सेविंग्स बैंक खाते में कैश जमा करने की नई लिमिट लागू होने वाली है, जिसका सीधा असर आम नागरिकों और व्यापारियों पर पड़ेगा।
इस नई सीमा के तहत, अगर कोई व्यक्ति एक वित्तीय वर्ष में एक निश्चित राशि से अधिक नकद जमा करता है, तो उसे इनकम टैक्स डिपार्टमेंट को इसकी जानकारी देनी होगी। इसका मुख्य उद्देश्य काले धन पर रोक लगाना और पारदर्शिता बढ़ाना है। इस आर्टिकल में हम आपको इस नए नियम की पूरी जानकारी देंगे, जिसमें लिमिट, टैक्स नियम और इसके प्रभाव शामिल हैं।
नई कैश डिपॉजिट लिमिट 2025 का ओवरव्यू
पैरामीटर | विवरण |
लागू तिथि | 1 अप्रैल 2025 से |
कैश डिपॉजिट लिमिट | 10 लाख रुपये प्रति वित्तीय वर्ष (एक से अधिक जमा का कुल योग) |
टैक्स नियम | इनकम टैक्स एक्ट, 1961 के सेक्शन 269ST के तहत |
जानकारी देना अनिवार्य | बैंक आयकर विभाग को रिपोर्ट करेगा |
लागू होगा | सेविंग्स अकाउंट, करंट अकाउंट, FD और अन्य बैंक खातों पर |
अपवाद | लोन लेना, चेक/डिमांड ड्राफ्ट से जमा, बैंक ट्रांसफर इस लिमिट में शामिल नहीं |
जुर्माना | नियम तोड़ने पर 100% जुर्माना लग सकता है |
उद्देश्य | काले धन पर रोक, पारदर्शिता बढ़ाना |
सेविंग्स बैंक खाते में कैश जमा करने की नई लिमिट 2025
1 अप्रैल 2025 से लागू हो रही नई कैश डिपॉजिट लिमिट के अनुसार, अगर कोई व्यक्ति एक साल में 10 लाख रुपये से अधिक नकद जमा करता है, तो बैंक इसकी सूचना आयकर विभाग को देगा। यह नियम इनकम टैक्स एक्ट, 1961 के सेक्शन 269ST के तहत लागू किया गया है।
इसका मतलब यह है कि अगर आप अपने सेविंग्स अकाउंट में 10 लाख रुपये से ज्यादा कैश जमा करते हैं, तो आपको टैक्स नोटिस मिल सकता है। इसलिए, अब आपको अपने कैश ट्रांजैक्शन को सावधानी से मैनेज करना होगा।
नई कैश डिपॉजिट लिमिट के मुख्य बिंदु
- 10 लाख रुपये सालाना लिमिट: अगर आप एक वित्तीय वर्ष (1 अप्रैल से 31 मार्च) में कुल मिलाकर 10 लाख रुपये से ज्यादा कैश जमा करते हैं, तो बैंक इसकी सूचना आयकर विभाग को देगा।
- एक से अधिक जमा का योग: अगर आप अलग-अलग बार कैश जमा करते हैं, तो सभी जमा रकम को जोड़कर चेक किया जाएगा।
- बैंक खातों का प्रकार: यह नियम सेविंग्स अकाउंट, करंट अकाउंट और FD सभी पर लागू होगा।
- अपवाद: अगर आप चेक, डिमांड ड्राफ्ट, बैंक ट्रांसफर या लोन के जरिए पैसे जमा करते हैं, तो यह लिमिट लागू नहीं होगी।
- जुर्माना: अगर कोई इस नियम को तोड़ता है, तो उस पर जमा रकम के बराबर (100%) जुर्माना लगाया जा सकता है।
नए नियम का आप पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
- छोटे व्यापारी और दुकानदार: जो लोग रोजाना कैश में लेनदेन करते हैं, उन्हें अब डिजिटल पेमेंट की ओर जाना होगा।
- किसान और मजदूर: जिनकी आमदनी कैश में होती है, उन्हें बैंक में ज्यादा कैश जमा करने से बचना होगा।
- सैलरी कमाने वाले: अगर आपकी सैलरी बैंक में आती है, तो आपको चिंता करने की जरूरत नहीं है, क्योंकि यह नियम कैश डिपॉजिट पर ही लागू होता है।
- टैक्स नोटिस का डर: अगर आप 10 लाख से ज्यादा कैश जमा करते हैं, तो आयकर विभाग की ओर से क्वेरी या नोटिस आ सकता है।
कैसे बचें नए नियम के नुकसान से?
- डिजिटल पेमेंट अपनाएं: UPI, NEFT, RTGS, चेक या बैंक ट्रांसफर का इस्तेमाल करें।
- कैश जमा करने से पहले चेक करें: साल में 10 लाख रुपये से ज्यादा कैश न जमा करें।
- अपने परिवार के सदस्यों के खाते का उपयोग करें: अगर जरूरत हो, तो पैसे को अलग-अलग खातों में जमा करें।
- टैक्स रिटर्न सही भरें: अगर आप कैश जमा करते हैं, तो उसकी सही जानकारी ITR में दें।
निष्कर्ष
1 अप्रैल 2025 से लागू हो रही नई कैश डिपॉजिट लिमिट का मकसद काले धन और टैक्स चोरी को रोकना है। अगर आप 10 लाख रुपये से ज्यादा कैश जमा करते हैं, तो आयकर विभाग की नजर आप पर पड़ सकती है। इसलिए, डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा दें और कैश लेनदेन को सीमित करें।
Disclaimer: यह आर्टिकल सिर्फ सूचना के उद्देश्य से लिखा गया है। 1 अप्रैल 2025 से लागू होने वाली नई कैश डिपॉजिट लिमिट की जानकारी आधिकारिक सरकारी सूत्रों पर आधारित है। हालांकि, नियमों में बदलाव हो सकता है, इसलिए आयकर विभाग या अपने बैंक से सलाह जरूर लें।